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Saturday, March 30, 2019

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा

मोहनदास करमचंद गाँधी की आत्मकथा


सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा महात्मा गाँधी की जन्म से लेकर 1921 की आत्मकथा है। इसका 1925 से 1927 के बीच नवजीवन में साप्ताहिक किस्तों में हुआ। मूल रूप में गुजराती में लिखी आत्मकथा का हिन्दी अनुवाद गाँधी के सहयोगी काशिनाथ त्रिवेदी ने किया है। विश्व के धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं की एक समिति ने इस पुस्तक को 20वी शताब्दी की सर्वोत्तम 100 आध्यात्मिक पुस्तकों में शामिल है।

यह पुस्तक हिन्दीकोश पर मुफ्त उपलब्ध है । इस डाउनलोड़ करने के लिए नीचे दिए लिंक पर जाएँ।



Download Link: Satya ke Prayog athava Atamkatha

Saturday, September 8, 2018

Sanjayacharya, Author

He loves to read and writes, specially about philosophy, religion and fiction. 

He also maintains two blogs - Hindikosh and Amarkosh. Hindikosh is dedicated to Hindi and Urdu fiction while Amarkosh is dedicated to philosophy and religion literature in Hindi and other languages.

His first book, a Hindi translation of Rabindranath Tagore's Gitanjali is available at Amazon.com.




Sanjayacharya, born and brought up in Delhi, engineer by profession and currently lives in Gurugram. 

संजयाचार्य, लेखक

 पढ़ना-लिखना पसंद है, विशेष रूप से फिलोसफी, धर्म और रचनात्मक साहित्य।

हिंदीकोश और अमरकोश नाम के दो ब्लॉग भी चलाते है।  हिंदीकोश पर हिन्दी तथा उर्दू साहित्य उपलब्ध है।और अमरकोश पर धर्म और दर्शन साहित्य हिंदी और अन्य भाषाओं में उपलब्ध है।

संजयाचार्य कृत रबिन्द्रनाथ टैगोर की गीतांजलि का हिन्दी अनुवाद अमेजन पर उपलब्ध है।

गीतांजलि - हिन्दी अनुवाद (ई-पुस्तक)


गीतांजलि - मूल बांग्ला और हिन्दी अनुवाद (ई-पुस्तक)


संजयाचार्य का जन्म दिल्ली में हुआ। दिल्ली में ही पले-बड़े। अब इंजीनियर का काम करते है और गुरुग्राम में रहते है।


Thursday, August 30, 2018

गीतांजलि - हिंदी अनुवाद

गुरुदेव रबिन्द्रनाथ द्वारा रचित गीतांजलि का हिन्दी अनुवाद अब अमेजन पर भी उपलब्ध है -- संजयाचार्य।





गीतांजलि


रबिन्द्रनाथ टैगोर


मेरा मस्तक नत कर अपने
चरण-धूलि के नीचे
सारा अहंकार हे, मेरा
डूबो दो आँसुओं में।


अपने गौरव की खातिर
अपना ही अपमान कर
खुद को बाँध घेर-घेरकर
मारा पल-पल।

सारा अहंकार हे, मेरा
डूबो दो आँसुओं में।


ना अपना गुणगान करूँ
मैं अपने कामों से
अपनी इच्छा करो हे पूर्ण
मेरे जीवन से।
मुझे दो अपनी परम शांति
प्राणों में अपनी परम कांति
मुझे उठाओ छिपा लो अपने
हृदय-कमल में।

सारा अहंकार हे, मेरा
डूबो दो आँसुओं में।


संजयाचार्य


सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा

मोहनदास करमचंद गाँधी की आत्मकथा सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा महात्मा गाँधी की जन्म से लेकर 1921 की आत्मकथा है। इसका 1925 से 1927 के बीच न...